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Horoscope Today April 10, 2024 : Aaj ka Rashifal April 10, 2024

Horoscope Today: Astrological prediction for 10 April 2024

वैदिक पंचांग

दिनांक – 10 अप्रैल 2024

दिन – बुधवार

विक्रम संवत – 2081 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार – 2080)

शक संवत -1946

अयन – उत्तरायण

ऋतु – वसंत ॠतु

मास – चैत्र

पक्ष – शुक्ल

तिथि – द्वितीया शाम 05:32 तक तत्पश्चात तृतीया

नक्षत्र – भरणी 11अप्रैल रात्रि 03:05 तक तत्पश्चात कृत्तिका

योग – विष्कंभ सुबह 10:38 तक तत्पश्चात प्रीति

राहुकाल – दोपहर 12:40 से दोपहर 02:14 तक

सूर्योदय-06:24

सूर्यास्त- 18:55

दिशाशूल – उत्तर दिशा में

व्रत पर्व विवरण – चेटीचंड,श्री झूलेलाल जयंती

तप की शक्ति का प्रतीक है मां ब्रह्मचारिणी

नवरात्रि की द्वितीया तिथि पर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। देवी ब्रह्मचारिणी ब्रह्म शक्ति यानी तप की शक्ति का प्रतीक हैं। इनकी आराधना से भक्त की तप करने की शक्ति बढ़ती है। साथ ही, सभी मनोवांछित कार्य पूर्ण होते हैं।

मां ब्रह्मचारिणी हमें यह संदेश देती है कि जीवन में बिना तपस्या अर्थात कठोर परिश्रम के सफलता प्राप्त करना असंभव है। बिना श्रम के सफलता प्राप्त करना ईश्वर के प्रबंधन के विपरीत है। अत: ब्रह्मशक्ति अर्थात समझने व तप करने की शक्ति हेतु इस दिन शक्ति का स्मरण करें। योगशास्त्र में यह शक्ति स्वाधिष्ठान चक्र में स्थित होती है। अत: समस्त ध्यान स्वाधिष्ठान चक्र में करने से यह शक्ति बलवान होती है एवं सर्वत्र सिद्धि व विजय प्राप्त होती है।

जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष

दिनांक 10 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 1 होगा। आप राजसी प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। आपको अपने ऊपर किसी का शासन पसंद नहीं है। आप साहसी और जिज्ञासु हैं। आपका मूलांक सूर्य ग्रह के द्वारा संचालित होता है।

आप सौन्दर्यप्रेमी हैं। आपमें सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला आपका आत्मविश्वास है। इसकी वजह से आप सहज ही महफिलों में छा जाते हैं। आप अत्यंत महत्वाकांक्षी हैं। आपकी मानसिक शक्ति प्रबल है। आपको समझ पाना बेहद मुश्किल है। आप आशावादी होने के कारण हर स्थिति का सामना करने में सक्षम होते हैं।

शुभ दिनांक : 1, 10, 19, 28

शुभ अंक : 1, 10, 19, 28, 37, 46, 55, 64, 73, 82

शुभ वर्ष : 2026, 2044, 2053, 2062

ईष्टदेव : सूर्य उपासना तथा मां गायत्री

शुभ रंग : लाल, केसरिया, क्रीम,

जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल :

स्वास्थ्य की दृष्टि से यह वर्ष उत्तम रहेगा। पारिवारिक मामलों में महत्वपूर्ण कार्य होंगे। अविवाहितों के लिए सुखद स्थिति बन रही है। विवाह के योग बनेंगे। नौकरीपेशा के लिए समय उत्तम हैं। पदोन्नति के योग हैं। बेरोजगारों के लिए भी खुशखबर है इस वर्ष आपकी मनोकामना पूरी होगी। यह वर्ष आपके लिए अत्यंत सुखद रहेगा। अधूरे कार्यों में सफलता मिलेगी

मेष दैनिक राशिफल (Aries Daily Horoscope)

आज का दिन आपके लिए मिश्चित रूप से फलदायक रहने वाला है। आप बिजनेस से संबंधित कोई भी फैसला अपने भाइयों के सलाह मश्वरे से ही लें। यदि आप किसी महत्वपूर्ण चर्चा में सम्मिलित हो रहे हैं तो अपनी बात अवश्य रखें। आपको संतान की संगति की ओर विशेष ध्यान देना होगा। आपकी तरक्की के मार्ग में यदि कुछ बाधाएं आ रही थी, तो वह आज दूर होगी। आपके कोई साहसी निर्णय ले सकते हैं। आज का दिन आपके लिए प्रभाव व प्रताप में वृद्धि लेकर आने वाला है। आप कार्यक्षेत्र में किसी बात को बेवजह बहसबाजी में ना पड़ें।

वृष दैनिक राशिफल (Taurus Daily Horoscope)

आज का दिन आपके लिए भाग्य के दृष्टिकोण से अच्छा रहने वाला है। परिवार के सदस्य के साथ आप कुछ समय मौज-मस्ती करने में व्यतीत करेंगे। आपको अपने किसी मित्र के सेहत की चिंता सता सकती है। कार्य क्षेत्र में आप अपने अनुभवों का पूरा लाभ उठाएंगे। परिवार के सदस्यों में यदि कोई आपसी खटपट चल रही थी, तो वह भी दूर होती दिख रही है। आप अपने बिजनेस में कोई बदलाव करने की योजना बना सकते हैं, जो आपके लिए अच्छे रहेगी। विदेश से लेनदेन कर रहे लोगों को सावधान रहने की आवश्यकता है।

मिथुन दैनिक राशिफल (Gemini Daily Horoscope)

आज का दिन आपके लिए जिम्मेदारी से कार्य करने के लिए रहेगा। आप अपने दिनचर्या में यदि कोई बदलाव करेंगे, तो उसमे आपको अच्छा लाभ मिलेगा। आपको अपने मित्र की कोई बात बुरी लग सकती है। घर में बाहर आज अपनी कामों को लेकर थोड़ा परेशान रहेंगे और उन्हें पूरा करके ही दम लेंगे। साझेदारी में किसी काम को करने में आप सोच विचार अवश्य करें। आपका कोई करीबी आपसे किसी बात को लेकर नाराज हो सकता है। संतान के विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती दिख रही है। रोजगार की तलाश कर रहे लोगों को कोई शुभ सूचना मिल सकती है।

कर्क दैनिक राशिफल (Cancer Daily Horoscope)

आज आप साझेदारी में काम न करें। व्यापार में यदि आपको कुछ परेशानियां चल रही थी, तो उनमें सुधार होगा। आप अपने साथी से किसी बात को लेकर नाराज हो सकते हैं। आपको अपने कामों पर पूरा फोकस बनाए रखने की आवश्यकता है। आपका कोई सोच समझ से काम पूरा होता दिख रहा है। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लोग पूरी लगन से पढ़ाई करेंगे। विद्यार्थियों को बौद्धिक व मानसिक बोझ से छुटकारा मिलता दिख रहा है।

सिंह दैनिक राशिफल (Leo Daily Horoscope)

आज का दिन आपके लिए मेहनत से काम करने के लिए रहेगा। आप अपने विरोधियों को अपने ऊपर हावी होने ना दें, इसलिए सतर्कता बरतें। सामाजिक क्षेत्र में कार्यरत लोगों को महिला मित्रों से सावधान रहने की आवश्यकता है। आप सरकारी काम में सफलता प्राप्त करेंगे। आपको शिक्षा में किसी साथी से मदद लेनी पड़ सकती है। आपके पिताजी की सहयोग से आपके काफी काम आसानी से पूरे हो पाएंगे। आप अपने मित्रों के साथ कुछ समय मौज मस्ती करने में व्यतीत करेंगे। आपके पिताजी को आपकी कोई बात बुरी लग सकती है।

कन्या दैनिक राशिफल (Virgo Daily Horoscope)

आज का दिन आपके लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। करियर को लेकर आपके मन में कुछ उलझने रहेंगी, जिन्हें सुलझाने के लिए आप अपने पिताजी से बातचीत करेंगे। आपको किसी बड़े निवेश की तैयारी बहुत ही सोच विचार कर करनी होगी। करियर में आपको अच्छा उछाल देखने को मिलेगा। नौकरी में कार्यरत होने के बाद को यदि किसी पार्ट टाइम कार्य करने की योजना बना रहे थे, तो उसके लिए भी आप समय निकाल पाएंगे। जीवनसाथी के साथ आप किसी यात्रा पर जाने की तैयारी कर सकते हैं।

तुला दैनिक राशिफल (Libra Daily Horoscope)

आज का दिन आपके लिए आर्थिक दृष्टिकोण से अच्छा रहने वाला है। आपको अपनी ऊर्जा को सही काम में लगाना होगा। परिवार के लोग इसका फायदा उठा सकते हैं। कार्यक्षेत्र में किसी अजनबी पर भरोसा करना नुकसान देगा। आपके परिवार के सदस्य यदि आपको कोई सलाह दें, तो आप उसे पर अमल अवश्य करें। कार्य क्षेत्र में कोई बड़ी डील फाइनल होते-होते रह सकती है। आपके सहकर्मियों को आपकी किसी बात से नाराजगी रहेगी। यदि ऐसा हो, तो आपको उस चिंता को दूर करने की कोशिश करनी होगी।

वृश्चिक दैनिक राशिफल (Scorpio Daily Horoscope)

आज का दिन आपके लिए आलस्य को त्याग कर आगे बढ़ने के लिए रहेगा। आपने यदि अपने आलस्य को अपने ऊपर हावी होने दिया तो काम बिगड़ सकता है। सामाजिक गतिविधियों में आपकी पूरी निष्ठा रहेगी। परिवार में कोई आपके मन मुताबिक काम कर सकता है, जो आपको खुशी देगा। जीवनसाथी का सहयोग आपको भरपूर मात्रा में मिलता दिख रहा है। यदि भाइयों के साथ रिश्तों में कोई मनमुटाव चल रहा है, तो वह भी दूर होगा। आपको अपने भाग्य को प्रबल रखना होगा।

धनु दैनिक राशिफल (Sagittarius Daily Horoscope)

आज का दिन आपके लिए मान सम्मान में वृद्धि लेकर आने वाला है। आपके व्यवहार से आपके काफी मित्र बन सकते हैं। व्यापार में धन लगाते समय इसका जिक्र किसी से न करें। परिवार में किसी मेहमान के आगमन होने से माहौल खुशनुमा रहेगा। आप अपने जीवन स्तर में सुधार लाने की कोशिश करेंगे। आपकी संतान को शिक्षा में कोई खुशखबरी सुनने को मिल सकती है। आपको किसी की कहीसुनी बातों में आने से बचना होगा। आपकी धन संबंधित योजनाएं गति पकड़ेंगी।

मकर दैनिक राशिफल (Capricorn Daily Horoscope)

आज दिन कारोबार के मामले में अच्छा लाभ लेकर आएगा। आपकी दीर्घकालीन योजनाओं को गति मिलेगी। आप अपने कामों को लेकर सावधान रहें। अपनी दिनचर्या का पूरा पालन करे, तभी आप अपने कामों को आसानी से पूरा कर पाएंगे। वैवाहिक जीवन जी रहे लोगों के लिए दिन मिला जुला रहेगा। आपको पारिवारिक विषयों में गंभीरता दिखानी होगी। संतान के करियर में चल रही समस्या आपको परेशान करेंगी। आप अपने किसी मित्र के कहने में आकर कोई निवेश कर सकते हैं। लेनदेन से संबंधित मामलों में आपको सावधान रहना होगा।

कुंभ दैनिक राशिफल (Aquarius Daily Horoscope)

आज का दिन रोजगार के मामले में अच्छा रहने वाला है। आपके खर्च आपको परेशान कर सकते हैं। यदि आप अपनी इन्कम को बढ़ाएंगे, तो उसमें आपको सफलता मिलेगी। विदेश से बिजनेस कर रहे लोगों को सावधान रहना होगा। प्रेम जीवन जी रहे लोग किसी लॉन्ग ड्राइव पर जा सकते हैं। आपको कार्यक्षेत्र में कोई गलती होने के कारण अपने बॉस से डांट खानी पड़ सकती है। वह आपके प्रमोशन पर भी रोक लगा सकती हैं। आपको वाहन चलाते समय सावधानी बरतनी होगी।

मीन दैनिक राशिफल (Pisces Daily Horoscope)

आज का दिन आपके लिए उत्तम रूप से फलदायक रहने वाला है। आप कार्यक्षेत्र में मुनाफे के चक्कर में किसी गलत काम को ना करें, नहीं तो समस्या हो सकती है। यदि आपको आपके साथी कोई सलाह दें, तो उस पर अमल करने से पहले सोच विचार अवश्य करें। किसी घरेलू मामले को घर में ही सुलझाएं और बाहर न आने दें। आपको किसी पैतृक संपत्ति की प्राप्ति हो सकती है, लेकिन उसमें पहले आपको कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने होंगे। आपको अपने परिवार के सदस्यों का पूरा साथ मिलेगा

🙏जय श्री राम 🙏

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Horoscope Today April 09, 2024 : Aaj ka Rashifal April 09, 2024

Horoscope Today: Astrological prediction for 09 April 2024

चैत्र नवरात्रि
चैत्र नवरात्रि 2024

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वैदिक पंचांग

दिनांक – 09 अप्रैल 2024

दिन – मंगलवार

विक्रम संवत – 2081 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार – 2080)

शक संवत -1946

अयन – उत्तरायण

ऋतु – वसंत ॠतु

मास – चैत्र

पक्ष – शुक्ल

तिथि – प्रतिपदा रात्रि 08:30 तक तत्पश्चात द्वितीया

नक्षत्र – रेवती सुबह 07:32 तक तत्पश्चात अश्विनी

योग – वैधृति दोपहर 02:18 तक तत्पश्चात विष्कंभ

राहुकाल – शाम 03:48 से शाम 05:22 तक

सूर्योदय-06:25

सूर्यास्त- 18:54

दिशाशूल – उत्तर दिशा में

व्रत पर्व विवरण – राष्ट्रीय चैत्री नूतन वर्ष वि॰सं॰2081 प्रारंभ,शालिवाहन शक 1946 प्रारंभ, उगादी (तेलुगु नूतन वर्ष),गुडी पडवा (पूरा दिन शुभ मुहूर्त), ध्वजारोहण,चैत्री- वासंती नवरात्र प्रारंभ, पंचक (समाप्त: सुबह 07:32),चंद्र-दर्शन (शाम 06:46 से रात्रि 07:28)

जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष

अंक ज्योतिष का सबसे आखरी मूलांक है नौ। आपके जन्मदिन की संख्या भी नौ है। यह मूलांक भूमि पुत्र मंगल के अधिकार में रहता है। आप बेहद साहसी हैं। आपके स्वभाव में एक विशेष प्रकार की तीव्रता पाई जाती है। आप सही मायनो में उत्साह और साहस के प्रतीक हैं।

मंगल ग्रहों में सेनापति माना जाता है। अत: आप में स्वाभाविक रूप से नेतृत्त्व की क्षमता पाई जाती है। लेकिन आपको बुद्धिमान नहीं माना जा सकता। मंगल के मूलांक वाले चालाक और चंचल भी होते हैं। आपको लड़ाई-झगड़ों में भी विशेष आनंद आता है। आपको विचित्र साहसिक व्यक्ति कहा जा सकता है।

शुभ दिनांक : 9, 18, 27

शुभ अंक : 1, 2, 5, 9, 27, 72

शुभ वर्ष : 2025, 2036, 2045

ईष्टदेव : हनुमान जी, मां दुर्गा।

शुभ रंग : लाल, केसरिया, पीला

जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल :

अपनी शक्ति का सदुपयोग कर प्रगति की और अग्रसर होंगे। पारिवारिक विवाद सुलझेंगे। महत्वपूर्ण कार्य योजनाओं में सफलता मिलेगी। अधिकार क्षेत्र में वृद्धि संभव है। नौकरी में आ रही बाधा दूर होगी। स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। राजनैतिक व्यक्ति सफलता का स्वाद चख सकते हैं। मित्रों स्वजनों का सहयोग मिलने से प्रसन्नता रहेगा

मेष दैनिक राशिफल (Aries Daily Horoscope)

आज का दिन आपके लिए लेनदेन के मामले में सावधान रहने के लिए रहेगा। अपने लंबे समय से रुके हुए काम को समय रहते पूरा करना होगा। आप अपने करियर को संवारेंगे। लेनदेन से संबंधित मामलों में आप सावधान रहें। धर्म कर्म के कार्यों के प्रति आपके काफी रुचि रहेगी। वैवाहिक जीवन में चल रही समस्याओं से आपको छुटकारा मिलेगा। आपकी माताजी आपसे किसी बात को लेकर नाराज हो सकती हैं। आप कहीं घूमने फिरने जाने के प्लानिंग कर सकते हैं। आपको माताजी से अपने मन की बात कहने का मौका मिलेगा।

वृष दैनिक राशिफल (Taurus Daily Horoscope)

आज का दिन आपके लिए किसी नए काम की शुरुआत करने के लिए अच्छा रहने वाला है। आप सामाजिक गतिविधियों में पूरी रुचि दिखाएंगे। यदि आपका कोई कोर्ट कचहरी से संबंधित मामला विवादित चल रहा है, तो उसमें आपको किसी अनुभवी व्यक्ति से सलाह मशवरे की आवश्यकता होगी। आप आज अपनी सोच समझ से काफी काम में आगे बढ़ेंगे। ससुराल पक्ष के किसी व्यक्ति से आपको मेल मिलाप करने का मौका मिल सकता है। आपकी तरक्की के मार्ग में आ रही बाधा दूर होंगी। संतान से कोई गलती होने के कारण आप उनसे नाराज हो सकते हैं।

मिथुन दैनिक राशिफल (Gemini Daily Horoscope)

आज का दिन नौकरी में कार्यरत लोगों के लिए अच्छा रहने वाला है। काम के सिलसिले में आप किसी लंबी दूरी की यात्रा पर जा सकते हैं। आपको परिवार के किसी सदस्य से किए हुए वादे को पूरा करना होगा। आपका कोई लंबे समय से रुका हुआ काम पूरा होने में समस्या आएगी। भाई व बहनों का आपको पूरा साथ मिलेगा। यदि आप अपनी सेहत में चल रही समस्याओं को नजर अंदाज करेंगे, तो वह बढ़ सकती हैं। आप तरक्की की राह पर आगे बढ़ेंगे। यदि आप भविष्य को लेकर किसी योजना में ध्यान लगाएंगे, तो वह भविष्य में आपके लिए अच्छा लाभ अवश्य लेकर आएगा।

कर्क दैनिक राशिफल (Cancer Daily Horoscope)

आज का दिन आपके लिए मिश्चित रूप से फलदायक रहने वाला है। कार्य क्षेत्र में आप अपनी अच्छी सोच का लाभ उठाएंगे। आप अपने कामों को खुद करने की कोशिश करेंगे। यदि आप उन्हें छोड़कर किसी दूसरे के भरोसे आगे बढ़ेंगे, तो आपको उन्हें पूरा करने में समस्या आएगी। आप अपनी जिम्मेदारियां को बखूबी निभाएंगे। आपके अंदर एक्स्ट्रा एनर्जी रहने के कारण आपके काफी काम में पूरे हो सकते हैं। आप अपनी अच्छी सोच से कुछ नए मित्र भी आसानी से बना पाएंगे। माता-पिता की सेवा के लिए भी आज आप कुछ समय निकालेंगे। जीवनसाथी से आपको तालमेल बनाकर चलना होगा।

सिंह दैनिक राशिफल (Leo Daily Horoscope)

आज का दिन आपको अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने के लिए रहेगा। आप कुछ उतार-चढ़ाव रहने के कारण परेशान रहेंगे। सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को किसी नए पद की प्राप्ति हो सकती है। उनके ऊपर जिम्मेदारियां का बोझ भी थोड़ा अधिक रहेगा। आप अपनी सेहत के प्रति सावधानी बरतें। आपका कोई पुराना रोग फिर से उभर सकता है। अविवाहित जातकों के जीवन में किसी नए मेहमान का आगमन हो सकता है। यदि आपको किसी बात को लेकर परेशानी चल रही थी, तो वह दूर होती दिख रही है। विद्यार्थी यदि किसी परीक्षा में भाग लेंगे, तो उसमें उन्हें सफलता अवश्य मिलेगी।

कन्या दैनिक राशिफल (Virgo Daily Horoscope)

आज का दिन आपके लिए मिलाजुला रहने वाला है। आपके आसपास रह रहे लोगों से आपको खुशखबरी मिलने से आप अच्छे मूड में रहेंगे। बिजनेस में किसी बड़ी स्कीम में धन लगा सकते हैं। यदि आपने अपने काम में लापरवाही दिखाई, तो बाद में आपको इसमे समस्या हो सकती है। विदेश से व्यवसाय कर रहे लोगों को सावधान रहने की आवश्यकता है। आलस्य को त्याग कर आगे बढ़ें, तभी आप सारे कामों का आसानी से कर पाएंगे। आप अपने घर किसी नए वाहन को लेकर आ सकते हैं। आप अच्छे खान-पान का आनंद लेंगे।

तुला दैनिक राशिफल (Libra Daily Horoscope)

आज का दिन आपके लिए खुशनुमा रहने वाला है। संतान को किसी अच्छी नौकरी के प्रति होने से आपका सिर गर्व से ऊंचा रहेगा। साझेदारी में आप किसी काम को करने की योजना बना सकते हैं। आपके खर्चीले स्वभाव के कारण परिवार के सदस्य आपकी इस आदत से परेशान रहेंगे, जिस कारण आप धन का संचय कम कर पाएंगे। परिवार में कोई बात को लेकर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। माताजी के आशीर्वाद से आप किसी काम को लेकर लंबी दूरी की यात्रा पर जा सकते हैं। सामाजिक क्षेत्रो में कार्यरत लोगों को किसी अच्छे काम को करने का मौका मिलेगा।

वृश्चिक दैनिक राशिफल (Scorpio Daily Horoscope)

आज का दिन आपके लिए बाकी दिनों की तुलना में बेहतर रहने वाला है। आपको अपने करीबियों से कोई अच्छी खुशखबरी सुनने को मिल सकती हैं। व्यापार से जुड़े जातकों की यदि कोई डील पेंडिंग चल रही थी, तो वह फाइनल होगी। आप अपने काम को यदि किसी दूसरे के भरोसे छोड़ेंगे, तो उसमें आपको सफलता मिलेगी। आपके सामने कुछ ऐसे खर्च आएंगे, जो आपको मजबूरी में ना चाहते हुए करने पड़ सकते हैं। आप किसी को धनुर्धर देने के लिए सोच विचार कर सकते हैं, जो आपके बीच किसी लड़ाई झगड़े की वजह बनेगा।

धनु दैनिक राशिफल (Sagittarius Daily Horoscope)

आज दिन मिश्रित रूप से फलदायक रहने वाला है। आप अपनी संतान के करियर को लेकर थोड़ा चिंतित रहेंगे। आप उनके मन में चल रही उलझनो को जानने की कोशिश करें। आप अपने अधूरे सपनों को पूरा करेंगे। स्वास्थ्य में चल रही समस्या से आपको छुटकारा मिलेगा। जीवन साथी के बीच किसी बात को लेकर कहा सुनी हो सकती है, जिसे आप बढ़ाएं ना। बिजनेस करने वाले लोगों को किसी काम को लेकर कोई नई योजना बनानी पड़ सकती है।

मकर दैनिक राशिफल (Capricorn Daily Horoscope)

आज का दिन आपके लिए व्यस्तता भरा रहने वाला है। आपको अत्यधिक मेहनत के बाद कोई अच्छा मुकाम हासिल होगा। आप दूसरों के भरोसे कोई महत्वपूर्ण काम ना करें नहीं तो वह रुक सकता है। आप अपने आवश्यक कामों की सूची बनाकर आगे बढ़े। आपको संतान से किसी किए हुए वादे को पूरा करना होगा, नहीं तो वह आपसे नाराज हो सकती है। कार्यक्षेत्र में आपके ऊपर काम का दबाव तो रहेगा, लेकिन फिर भी आप उसे इंजॉय करेंगे। ऑनलाइन काम कर रहे लोगों को कोई बड़ा ऑर्डर मिल सकता है। आपको अपने आसपास में हो रहे लड़ाई झगड़े में पड़ने से बचना होगा।

कुंभ दैनिक राशिफल (Aquarius Daily Horoscope)

आज का दिन आपके लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आएगा। यदि आपको कार्यक्षेत्र में कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था, तो वह भी दूर होती दिख रही हैं। आप अपने दोस्तों के साथ कहीं घूमने फिरने जाने की प्लानिंग करेंगे, जिससे आप कुछ समय के लिए टेंशन फ्री रह सकेंगे। आपका कोई लंबे समय से रुका हुआ काम पूरा हो सकता है। सगे संबंधियों से आप मेल मिलाप करने जा सकते हैं। जीवनसाथी का सहयोग व सानिध्य आपको भरपूर मात्रा में मिलेगा।

मीन दैनिक राशिफल (Pisces Daily Horoscope)

आज का दिन आपके लिए चिंता ग्रस्त रहने वाला है। आप अपने कामों में आत्मविश्वास से आगे बढ़े, तो आपके लिए अच्छा रहेगा। आपके बढ़ते खर्चो का आपको लेखा-जोखा रखना होगा। आपको कार्य क्षेत्र में अच्छा लाभ मिलने से आपको प्रसन्नता रहेगी। वरिष्ठ सदस्यों से आपको किसी काम को लेकर बातचीत करनी पड़ सकती है। आप अपनी दिनचर्या में कोई बदलाव ना करें, नहीं तो आपको उसे पूरा करने में समस्या होगी। यदि परिवार के सदस्यों में किसी बात को लेकर मतभेद चल रहा था, तो वह भी दूर होगा

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Horoscope Today April 09, 2024 : Aaj ka Rashifal April 09, 2024 Read More »

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Chaitra Navratri 2024||नव संवत्सर 2081। हिंदू नव वर्ष 2081॥Navratri Special|

img 7436 2 1चैत्र नवरात्रि 2024 संपूर्ण जानकारी :-

नवरात्रि पूजन विधि

09 अप्रैल 2024 मंगलवार से नवरात्रि प्रारंभ ।

नवरात्रि के प्रत्येक दिन माँ भगवती के एक स्वरुप श्री शैलपुत्री, श्री ब्रह्मचारिणी, श्री चंद्रघंटा, श्री कुष्मांडा, श्री स्कंदमाता, श्री कात्यायनी, श्री कालरात्रि, श्री महागौरी, श्री सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। यह क्रम चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को प्रातःकाल शुरू होता है। प्रतिदिन जल्दी स्नान करके माँ भगवती का ध्यान तथा पूजन करना चाहिए। सर्वप्रथम कलश स्थापना की जाती है।

कलश / घट स्थापना विधि

घट स्थापना शुभ मुहूर्त

09 अप्रैल 2024 मंगलवार को सुबह 06:25 से 10:35 तक

अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:15 से दोपहर 01:05 तक

देवी पुराण के अनुसार मां भगवती की पूजा-अर्चना करते समय सर्वप्रथम कलश / घट की स्थापना की जाती है। घट स्थापना करना अर्थात नवरात्रि की कालावधि में ब्रह्मांड में कार्यरत शक्ति तत्त्व का घट में आवाहन कर उसे कार्यरत करना । कार्यरत शक्ति तत्त्व के कारण वास्तु में विद्यमान कष्टदायक तरंगें समूल नष्ट हो जाती है। धर्मशास्त्रों के अनुसार कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है। कलश के मुख में विष्णुजी का निवास, कंठ में रुद्र तथा मूल में ब्रह्मा स्थित हैं और कलश के मध्य में दैवीय मातृशक्तियां निवास करती हैं।*

सामग्री:-

👉🏻जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र

👉🏻जौ बोने के लिए शुद्ध साफ़ की हुई मिटटी

👉🏻पात्र में बोने के लिए जौ

👉🏻घट स्थापना के लिए मिट्टी का कलश

(“हैमो वा राजतस्ताम्रो मृण्मयो वापि ह्यव्रणः” अर्थात ‘कलश’ सोने, चांदी, तांबे या मिट्टी का छेद रहित और सुदृढ़ उत्तम माना गया है। वह मङ्गलकार्यों में मङ्गलकारी होता है )

👉🏻कलश में भरने के लिए शुद्ध जल, गंगाजल

👉🏻मौली (Sacred Thread)

👉🏻इत्र

👉🏻साबुत सुपारी

👉🏻दूर्वा

👉🏻कलश में रखने के लिए कुछ सिक्के

👉🏻पंचरत्न

👉🏻अशोक या आम के 5 पत्ते

👉🏻कलश ढकने के लिए ढक्कन

👉🏻ढक्कन में रखने के लिए बिना टूटे चावल

👉🏻पानी वाला नारियल

👉🏻नारियल पर लपेटने के लिए लाल कपडा

👉🏻फूल माला

विधि

सबसे पहले जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र लें। इस पात्र में मिट्टी की एक परत बिछाएं। अब एक परत जौ की बिछाएं। इसके ऊपर फिर मिट्टी की एक परत बिछाएं। अब फिर एक परत जौ की बिछाएं। जौ के बीच चारों तरफ बिछाएं ताकि जौ कलश के नीचे न दबे। इसके ऊपर फिर मिट्टी की एक परत बिछाएं। अब कलश के कंठ पर मौली बाँध दें। कलश के ऊपर रोली से ॐ और स्वास्तिक लिखें। अब कलश में शुद्ध जल, गंगाजल कंठ तक भर दें। कलश में साबुत सुपारी, दूर्वा, फूल डालें। कलश में थोडा सा इत्र डाल दें। कलश में पंचरत्न डालें। कलश में कुछ सिक्के रख दें। कलश में अशोक या आम के पांच पत्ते रख दें। अब कलश का मुख ढक्कन से बंद कर दें। ढक्कन में चावल भर दें।

श्रीमद्देवीभागवत पुराण के अनुसार

पञ्चपल्लवसंयुक्तं वेदमन्त्रैः सुसंस्कृतम्। सुतीर्थजलसम्पूर्णं हेमरत्नैः समन्वितम्॥”

अर्थात कलश पंचपल्लवयुक्त, वैदिक मन्त्रों से भली भाँति संस्कृत, उत्तम तीर्थ के जल से पूर्ण और सुवर्ण तथा पंचरत्न मई होना चाहिए।

नारियल पर लाल कपडा लपेट कर मौली लपेट दें। अब नारियल को कलश पर रखें। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है: “अधोमुखं शत्रु विवर्धनाय, ऊर्ध्वस्य वस्त्रं बहुरोग वृध्यै। प्राचीमुखं वित विनाशनाय, तस्तमात् शुभं संमुख्यं नारीकेलं”। अर्थात् नारियल का मुख नीचे की तरफ रखने से शत्रु में वृद्धि होती है। नारियल का मुख ऊपर की तरफ रखने से रोग बढ़ते हैं, जबकि पूर्व की तरफ नारियल का मुख रखने से धन का विनाश होता है। इसलिए नारियल की स्थापना सदैव इस प्रकार करनी चाहिए कि उसका मुख साधक की तरफ रहे। ध्यान रहे कि नारियल का मुख उस सिरे पर होता है, जिस तरफ से वह पेड़ की टहनी से जुड़ा होता है।

अब कलश को उठाकर जौ के पात्र में बीचो बीच रख दें। अब कलश में सभी देवी देवताओं का आवाहन करें। “हे सभी देवी देवता और माँ दुर्गा आप सभी नौ दिनों के लिए इसमें पधारें।” अब दीपक जलाकर कलश का पूजन करें। धूपबत्ती कलश को दिखाएं। कलश को माला अर्पित करें। कलश को फल मिठाई अर्पित करें। कलश को इत्र समर्पित करें।

कलश स्थापना के बाद माँ दुर्गा की चौकी स्थापित की जाती है।

नवरात्रि के प्रथम दिन एक लकड़ी की चौकी की स्थापना करनी चाहिए। इसको गंगाजल से पवित्र करके इसके ऊपर सुन्दर लाल वस्त्र बिछाना चाहिए। इसको कलश के दायीं ओर रखना चाहिए। उसके बाद माँ भगवती की धातु की मूर्ति अथवा नवदुर्गा का फ्रेम किया हुआ फोटो स्थापित करना चाहिए। मूर्ति के अभाव में नवार्णमन्त्र युक्त यन्त्र को स्थापित करें। माँ दुर्गा को लाल चुनरी उड़ानी चाहिए। माँ दुर्गा से प्रार्थना करें “हे माँ दुर्गा आप नौ दिन के लिए इस चौकी में विराजिये।

उसके बाद सबसे पहले माँ को दीपक दिखाइए। उसके बाद धूप, फूलमाला, इत्र समर्पित करें। फल, मिठाई अर्पित करें।

नवरात्रि में नौ दिन मां भगवती का व्रत रखने का तथा प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करने का विशेष महत्व है। हर एक मनोकामना पूरी हो जाती है। सभी कष्टों से छुटकारा दिलाता है।

नवरात्रि के प्रथम दिन ही अखंड ज्योत जलाई जाती है जो नौ दिन तक जलती रहती है। दीपक के नीचे “चावल” रखने से माँ लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है तथा “सप्तधान्य” रखने से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते है

माता की पूजा “लाल रंग के कम्बल” के आसन पर बैठकर करना उत्तम माना गया है

नवरात्रि के प्रतिदिन माता रानी को फूलों का हार चढ़ाना चाहिए। प्रतिदिन घी का दीपक (माता के पूजन हेतु सोने, चाँदी, कांसे के दीपक का उपयोग उत्तम होता है) जलाकर माँ भगवती को मिष्ठान का भोग लगाना चाहिए। मान भगवती को इत्र/अत्तर विशेष प्रिय है।

नवरात्रि के प्रतिदिन कंडे की धुनी जलाकर उसमें घी, हवन सामग्री, बताशा, लौंग का जोड़ा, पान, सुपारी, कर्पूर, गूगल, इलायची, किसमिस, कमलगट्टा जरूर अर्पित करना चाहिए।

लक्ष्मी प्राप्ति के लिए नवरात्रि में पान और गुलाब की ७ पंखुरियां रखें तथा मां भगवती को अर्पित कर दें

मां दुर्गा को प्रतिदिन विशेष भोग लगाया जाता है। किस दिन किस चीज़ का भोग लगाना है ये हम विस्तार में आगे बताएँगे।

प्रतिदिन कन्याओं का विशेष पूजन किया जाता है।

श्रीमद्देवीभागवत पुराण के अनुसार

एकैकां पूजयेत् कन्यामेकवृद्ध्या तथैव च। द्विगुणं त्रिगुणं वापि प्रत्येकं नवकन्तु वा॥”

अर्थात नित्य ही एक कुमारी का पूजन करें अथवा प्रतिदिन एक-एक-कुमारी की संख्या के वृद्धिक्रम से पूजन करें अथवा प्रतिदिन दुगुने-तिगुने के वृद्धिक्रम से और या तो प्रत्येक दिन नौ कुमारी कन्याओं का पूजन करें।

यदि कोई व्यक्ति नवरात्रि पर्यन्त प्रतिदिन पूजा करने में असमर्थ हैं तो उसे अष्टमी तिथि को विशेष रूप से अवश्य पूजा करनी चाहिए। प्राचीन काल में दक्ष के यज्ञ का विध्वंश करने वाली महाभयानक भगवती भद्रकाली करोङों योगिनियों सहित अष्टमी तिथि को ही प्रकट हुई थीं।

नौ दिनों में माता के अलग-अलग स्वरुपों की पूजा की जाती है. इन दिनों की अलग-अलग पूजा विधि होती है, जबकि नौ दिनों के लिए अलग-अलग मंत्री भी शास्त्रों में बनाए गए हैं. शास्त्रों के हिसाब से 9 दिनों में इन्ही मंत्रों के साथ माता की पूजा की जाती है. खास बात यह है कि अलग-अलग दिन माता को भोग भी अलग-अलग ही लगाया जाता है. नवरात्रि पर पूजन विधि से जुड़ी पूरी जानकारी अधोलिखित है :-

पहले दिन मां भगवती के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा की जाती है. दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कूष्माण्डा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवे दिन महागौरी और नौवें दिन सिद्धिदात्री के रूप में माता को पूजा जाता है. हर दिन मां के अलग-अलग मंत्रों का उच्चारण करने से मनोकामना पूरी होती है और व्रत सफल होता है. 

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1. पहला दिन यानि मां शैलपुत्री:– शैलपुत्री पूजन विधि ( Shailputri Puja Vidhi) :  दुर्गा को मातृ शक्ति यानी स्नेह, करूणा और ममता का स्वरूप मानकर हम पूजते हैं, अत: इनकी पूजा में सभी तीर्थों, नदियों, समुद्रों, नवग्रहों, दिक्पालों, दिशाओं, नगर देवता, ग्राम देवता सहित सभी योगिनियों को भी आमंत्रित किया जाता और और कलश में उन्हें विराजने हेतु प्रार्थना सहित उनका आहवान किया जाता है। नवरात्र पर कलश स्थापना के साथ ही मां दुर्गा की पूजा शुरू की जाती है। पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा होती है. कलश में सप्तमृतिका यानी सात प्रकार की मिट्टी, सुपारी, मुद्रा सादर भेट किया जाता है और पंच प्रकार के पल्लव से कलश को सुशोभित किया जाता है।इस कलश के नीचे सात प्रकार के अनाज और जौ बोये जाते हैं जिन्हें दशमी तिथि को काटा जाता है और इससे सभी देवी-देवता की पूजा होती है।इसे जयन्ती कहते हैं जिसे इस मंत्र के साथ अर्पित किया जाता है “जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी, दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा, स्वधा नामोस्तुते”. इसी मंत्र से पुरोहित यजमान के परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर जयंती डालकर सुख, सम्पत्ति एवं आरोग्य का आर्शीवाद देते हैं।

शैलपुत्री पूजन महत्व (Significance of Worshipping Shailputri) :  देवी दुर्गा की प्रतिमा पूजा स्थल पर बीच में स्थापित की जाती है और उनके दोनों तरफ यानी दायीं ओर देवी महालक्ष्मी, गणेश और विजया नामक योगिनी की प्रतिमा रहती है। वहीं बायीं ओर कार्तिकेय, देवी महासरस्वती और जया नामक योगिनी रहती है तथा भगवान भोले नाथ की भी पूजा की जाती है। प्रथम पूजन के दिन “शैलपुत्री” के रूप में भगवती दुर्गा दुर्गतिनाशिनी की पूजा फूल, अक्षत, रोली, चंदन से होती है।

मंत्रवन्दे वांच्छितलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌।

      वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ॥

कलश स्थापना के पश्चात देवी दु्र्गा जिन्होंने दुर्गम नामक प्रलयंकारी अ-सुर का संहार कर अपने भक्तों को उसके त्रास से यानी पीड़ा से मुक्त कराया उस देवी का आह्वान किया जाता है. प्रतिदिन संध्या काल में देवी की आरती होती है. आरती में “जग जननी जय जय” और “जय अम्बे गौरी” के गीत भक्त जन गाते हैं.

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2. दूसरा दिन यानि मां ब्रह्मचारिणी: दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. नवरात्र पर्व के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। साधक इस दिन अपने मन को माँ के चरणों में लगाते हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएँ हाथ में कमण्डल रहता है।मां दुर्गाजी का यह दूसरा स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनन्तफल देने वाला है। इनकी उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। जीवन के कठिन संघर्षों में भी उसका मन कर्तव्य-पथ से विचलित नहीं होता।मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से उसे सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन इन्हीं के स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन ‘स्वाधिष्ठान ’चक्र में शिथिल होता है। इस चक्र में अवस्थित मनवाला योगी उनकी कृपा और भक्ति प्राप्त करता है।

मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा विधि:  देवी ब्रह्मचारिणी जी की पूजा में सर्वप्रथम माता की फूल, अक्षत, रोली, चंदन, से पूजा करें तथा उन्हें दूध, दही, शर्करा, घृत, व मधु से स्नान करायें व देवी को प्रसाद अर्पित करें। प्रसाद के पश्चात आचमन और फिर पान, सुपारी भेंट कर इनकी प्रदक्षिणा करें। कलश देवता की पूजा के पश्चात इसी प्रकार नवग्रह, दशदिक्पाल, नगर देवता, ग्राम देवता, की पूजा करें। देवी की पूजा करते समय सबसे पहले हाथों में एक फूल लेकर प्रार्थना करें-

मंत्र: दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।

      देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

इसके पश्चात् देवी को पंचामृत स्नान करायें और फिर भांति भांति से फूल, अक्षत, कुमकुम, सिन्दुर, अर्पित करें देवी को अरूहूल का फूल व कमल बेहद प्रिय होते हैं अत: इन फूलों की माला पहनायें, घी व कपूर मिलाकर देवी की आरती करें।

मां ब्रह्मचारिणी का स्रोत पाठ”

तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्।

ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥

शंकरप्रिया त्वंहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी।

शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणीप्रणमाम्यहम्॥

“मां ब्रह्मचारिणी का कवच” 

त्रिपुरा में हृदयं पातु ललाटे पातु शंकरभामिनी।

अर्पण सदापातु नेत्रो, अर्धरी च कपोलो॥

पंचदशी कण्ठे पातुमध्यदेशे पातुमहेश्वरी॥

षोडशी सदापातु नाभो गृहो च पादयो।

अंग प्रत्यंग सतत पातु ब्रह्मचारिणी।

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3.तीसरा दिन यानि मां चंद्रघंटा: तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को पूजा जाता है. नवरात्र का तीसरा दिन भय से मुक्ति और अपार साहस प्राप्त करने का होता है। इस दिन मां के चंद्रघंटा स्वरुप की उपासना की जाती है। इनके सिर पर घंटे के आकार का चंद्रमा है। इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। इनके दसों हाथों में अ-स्त्र-शस्त्र हैं और इनकी मुद्रा युद्ध की मुद्रा है। मां चंद्रघंटा तंभ साधना में मणिपुर चक्र को नियंत्रित करती है और ज्योतिष में इनका संबंध मंगल ग्रह से होता है।

ऐसे करें पूजा : मां चंद्रघंटा , जिनके माथे पर घंटे के आकार का एक चंद्र होता है. इनकी पूजा करने से शांति आती है, परिवार का कल्याण होता है. मां को लाल फूल चढ़ाएं, लाल सेब और गुड़ चढाएं, घंटा बजाकर पूजा करें, ढोल और नगाड़े बजाकर पूजा और आरती करें, शुत्रुओं की हार होगी। इस दिन गाय के दूध का प्रसाद चढ़ाने का विशेष विधान है। इससे हर तरह के दुखों से मुक्ति मिलती है।

मंत्र:पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता।

     प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥

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4. चौथा दिन यानि मां कूष्माण्डा: चौथे दिन मां कूष्माण्डा की पूजा की जाती है.नवरात्र के चौथे दिन मां पारांबरा भगवती दुर्गा के कुष्मांडा स्वरुप की पूजा की जाती है। मान्‍यता ये है कि जब सृष्टि का अ-स्तित्व नहीं था, तब कुष्माण्डा देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी।अपनी मंद-मंद मुस्कान भर से ब्रम्हांड की उत्पत्ति करने के कारण ही इन्हें कुष्माण्डा के नाम से जाना जाता है इसलिए ये सृष्टि की आदि-स्वरूपा, आदिशक्ति हैं। देवी कुष्मांडा का निवास सूर्यमंडल के भीतर के लोक में है जहां निवास कर सकने की क्षमता और शक्ति केवल इन्हीं में है। इनके शरीर की कांति और प्रभा सूर्य के समान ही अलौकिक हैं।माता के तेज और प्रकाश से दसों दिशाएं प्रकाशित होती हैं ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में मौजूद तेज मां कुष्मांडा की छाया है। मां कुष्‍माण्‍डा की आठ भुजाएं हैं। इसलिए मां कुष्मांडा को अष्टभुजा देवी के नाम से भी जाना जाता हैं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है। मां सिंह के वाहन पर सवार रहती हैं।

मंत्र: सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।

      दधाना हस्तपद्माभ्यां कुष्मांडा शुभदास्तु मे॥

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5. पांचवां दिन यानि मां स्कंदमाता :नवरात्र का पांचवां दिनस्कंदमाता की उपासना का दिन होता है। मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता परम सुखदायी हैं। माँ अपने भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं। भगवान स्कंद ‘कुमार कार्तिकेय’ नाम से भी जाने जाते हैं। ये प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवताओं के सेनापति बने थे। पुराणों में इन्हें कुमार और शक्ति कहकर इनकी महिमा का वर्णन किया गया है। इन्हीं भगवान स्कंद की माता होने के कारण माँ दुर्गाजी के इस स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है।स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं। इनके दाहिनी तरफ की नीचे वाली भुजा, जो ऊपर की ओर उठी हुई है, उसमें कमल पुष्प है। बाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा में वरमुद्रा में तथा नीचे वाली भुजा जो ऊपर की ओर उठी है उसमें भी कमल पुष्प ली हुई हैं। इनका वर्ण पूर्णत: शुभ्र है। ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसी कारण इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। सिंह इनका भी वाहन है।

स्कन्दमाता की पूजा विधि : कुण्डलिनी जागरण के उद्देश्य से जो साधक दुर्गा मां की उपासना कर रहे हैं उनके लिए दुर्गा पूजा का यह दिन विशुद्ध चक्र की साधना का होता है। इस चक्र का भेदन करने के लिए साधक को पहले मां की विधि सहित पूजा करनी चाहिए। पूजा के लिए कुश अथवा कम्बल के पवित्र आसन पर बैठकर पूजा प्रक्रिया को उसी प्रकार से शुरू करना चाहिए जैसे आपने अब तक के चार दिनों में किया है फिर इस मंत्र से देवी की प्रार्थना करनी चाहिए।

मंत्र: सिंहसनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।

      शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी॥

अब पंचोपचार विधि से देवी स्कन्दमाता की पूजा कीजिए। नवरात्रे की पंचमी तिथि को कहीं कहीं भक्त जन उद्यंग ललिता का व्रत भी रखते हैं। इस व्रत को फलदायक कहा गया है। जो भक्त देवी स्कन्द माता की भक्ति-भाव सहित पूजन करते हैं उसे देवी की कृपा प्राप्त होती है। देवी की कृपा से भक्त की मुराद पूरी होती है और घर में सुख, शांति एवं समृद्धि रहती है।

स्कन्दमाता की मंत्र:

सिंहासना गता नित्यं पद्माश्रि तकरद्वया ।

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी ।।

या देवी सर्वभू?तेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

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6.छठवां दिन यानि मां कात्यायनी:मां दुर्गा के छठे स्वरूप का नाम कात्यायनी है। उस दिन साधक का मन ‘आज्ञा’ चक्र में स्थित होता है। योगसाधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इस चक्र में स्थित मन वाला साधक माँ कात्यायनी के चरणों में अपना सर्वस्व निवेदित कर देता है। परिपूर्ण आत्मदान करने वाले ऐसे भक्तों को सहज भाव से मां के दर्शन प्राप्त हो जाते हैं।

मां कात्यायनी का स्वरूप : मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यन्त दिव्य और स्वर्ण के समान चमकीला है। यह अपनी प्रिय सवारी सिंह पर विराजमान रहती हैं। इनकी चार भुजायें भक्तों को वरदान देती हैं, इनका एक हाथ अभय मुद्रा में है, तो दूसरा हाथ वरदमुद्रा में है अन्य हाथों में तलवार और कमल का फूल है।देवी कात्यायनी अमोद्य फलदायिनी हैं इनकी पूजा अर्चना द्वारा सभी संकटों का नाश होता है, मां कात्यायनी दानवों तथा पापियों का नाश करने वाली हैं। मान्यता के अनुसार देवी कात्यायनी जी के पूजन से भक्त के भीतर अद्भुत शक्ति का संचार होता है। भक्त को माता के पूजन द्वारा सहजभाव से मां कात्यायनी के दर्शन प्राप्त होते हैं। साधक इस लोक में रहते हुए अलौकिक तेज से युक्त रहता है।

मां कात्यायनी की पूजा विधि : नवरात्रों के छठे दिन मां कात्यायनी की सभी प्रकार से विधिवत पूजा अर्चना करनी चाहिए फिर मां का आशीर्वाद लेना चाहिए और साधना में बैठना चाहिए। इस प्रकार जो साधक प्रयास करते हैं उन्हें भगवती कात्यायनी सभी प्रकार के भय से मुक्त करती हैं. मां कात्यायनी की भक्ति से धर्म, अर्थ, कर्म, काम, मोक्ष की प्राप्ति होती है। पूजा की विधि शुरू करने पर हाथों में फूल लेकर देवी को प्रणाम कर देवी के मंत्र का ध्यान किया जाता है. देवी की पूजा के पश्चात महादेव और परम पिता की पूजा करनी चाहिए. श्री हरि की पूजा देवी लक्ष्मी के साथ ही करनी चाहिए।

मंत्र:चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।

     कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥

चढावा- षष्ठी तिथि के दिन देवी के पूजन में मधु का महत्व बताया गया है। इस दिन प्रसाद में मधु यानि शहद का प्रयोग करना चाहिए।

मनोकामना- मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी मानी गई हैं। शिक्षा प्राप्ति के क्षेत्र में प्रयासरत भक्तों को माता की अवश्य उपासना करनी चाहिए।

मनोवान्छित वर की प्राप्ति :माना जाता है कि जिन कन्याओं के विवाह मे विलम्ब हो रहा हो, उन्हे इस दिन माँ कात्यायनी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, जिससे उन्हें मनोवान्छित वर की प्राप्ति होती है।

विवाह के लिए कात्यायनी मन्त्र- 

ऊॅं कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरि ! नंदगोपसुतम् देवि पतिम् मे कुरुते नम:।’

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7. सातवां दिन यानि मां कालरात्रि:नवरात्रि के सातवें दिन होती है मां कालरात्रि की पूजा। मां कालरात्रि को यंत्र, मंत्र और तंत्र की देवी कहा जाता है। कहा जाता है कि देवी दुर्गा ने रक्तबीज का वध करने के लिए कालरात्रि को अपने तेज से उत्पन्न किया था। इनकी उपासना से प्राणी सर्वथा भय मुक्त हो जाता है।ऐसा है मां का स्वरूप: इनके शरीर का रंग काला है। मां कालरात्रि के गले में नरमुंड की माला है। कालरात्रि के तीन नेत्र हैं और उनके केश खुले हुए हैं। मां गर्दभ  की सवारी करती हैं। मां के चार हाथ हैं एक हाथ में कटार और एक हाथ में लोहे का कांटा है।

मंत्र: 

    ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।

     दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तु ते।।

     जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्तिहारिणि।                    

     जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोस्तु ते।।

– धां धीं धूं धूर्जटे: पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी

क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु।

बीज मंत्र :  ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ( तीन, सात या ग्यारह माला करें)

कालरात्रि पूजा विधि  :  सप्तमी की पूजा अन्य दिनों की तरह ही होती परंतु रात्रि में विशेष विधान के साथ देवी की पूजा की जाती है। इस दिन कहीं कहीं तांत्रिक विधि से पूजा होने पर मदिरा भी देवी को अर्पित कि जाती है। सप्तमी की रात्रि ‘सिद्धियों’ की रात भी कही जाती है। पूजा विधान में शास्त्रों में जैसा वर्णित हैं उसके अनुसार पहले कलश की पूजा करनी चाहिए।

नवग्रह, दशदिक्पाल, देवी के परिवार में उपस्थित देवी देवता की पूजा करनी चाहिए फिर मां कालरात्रि की पूजा करनी चाहिए। दुर्गा पूजा में सप्तमी तिथि का काफी महत्व बताया गया है। इस दिन से भक्त जनों के लिए देवी मां का दरवाज़ा खुल जाता है और भक्तगण पूजा स्थलों पर देवी के दर्शन हेतु पूजा स्थल पर जुटने लगते हैं।

मनोकामना: मां की इस तरह की पूजा से मृत्यु का भय नहीं सताता। देवी का यह रूप ऋद्धि- सिद्धि प्रदान करने वाला है। देवी भगवती के प्रताप से सब मंगल ही मंगल होता है।

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8.आठवां दिन यानि मां महागौरी: नवरात्र के आठवें दिन आठवीं दुर्गा यानि की महागौरी की पूजा अर्चना और आराधना की जाती है। कहते हैं अपनी कठीन तपस्या से मां ने गौर वर्ण प्राप्त किया था। तभी से इन्हें उज्जवला स्वरूपा महागौरी, धन ऐश्वर्य प्रदायिनी, चैतन्यमयी त्रैलोक्य पूज्य मंगला, शारीरिक मानसिक और सांसारिक ताप का हरण करने वाली माता महागौरी का नाम दिया गया। 

श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः। 

महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा ।।

मां महागौरी की पूजा करने से मन पवित्र हो जाता है और भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस दिन षोडशोपचार पूजन किया जाता है। मां की कृपा से अलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति होती है। देवी महागौरी का अत्यंत गौर वर्ण हैं। इनके वस्त्र और आभूषण सफेद हैं। इनकी चार भुजाएं हैं। महागौरी का वाहन बैल है। देवी के दाहिने ओर के ऊपर वाले हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले हाथ में त्रिशूल है। बाएं ओर के ऊपर वाले हाथ में डमरू और नीचे वाले हाथ में वर मुद्रा है।

पूजन विधि इस प्रकार है : सबसे पहले गंगा जल से शुद्धिकरण करके देवी मां महागौरी की प्रतिमा या तस्वीर चौकी पर स्थापित करें। इसके बाद चौकी पर चांदी, तांबे या मिट्टी के घड़े में जल भरकर उस पर नारियल रखकर कलश स्थापना करें। उसी चौकी पर श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका (16 देवी), सप्त घृत मातृका(सात सिंदूर की बिंदी लगाएं) की स्थापना भी करें।इसके बाद व्रत, पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा माता महागौरी सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें। इसमें आवाहन, आसन, पाद्य, अध्र्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि आदि करें। इस दिन माता दुर्गा को नारियल का भोग लगाएं और नारियल का दान भी करें।

मां महागौरी का उपासना मंत्र: 

श्वेते वृषे समारुढ़ा, श्वेताम्बरधरा शुचिः।

महागौरीं शुभं दद्यान्महादेवप्रमोदया।।

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9.नौवां दिन यानि मां सिद्धिदात्री :-नवरात्रि के नौवें और आखिरी दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां दुर्गा की नौवीं शक्ति देवी सिद्धिदात्री की पूजा करने से भक्तों को सारी सिद्धियां प्राप्त होती हैं। देवी सिद्धिदात्री को मां सरस्वती का भी एक रूप माना जाता है क्योंकि माता अपने सफेद वस्त्र एवं अलंकार से सुसज्जित अपने भक्तों को महाज्ञान एवं मधुर स्वर से मन्त्र-मुग्ध करती है। सिद्धिदात्री मां की पूजा के बाद ही अगले दिन दशहरा त्योहार मनाया जाता है।

देवी सिद्धिदात्री का रूप अत्यंत सौम्य है, देवी की चार भुजाएं हैं। दाईं भुजा में माता ने चक्र और गदा धारण किया है और बांई भुजा में शंख और कमल का फूल है। मां सिद्धिदात्री कमल आसन पर विराजमान रहती हैं, मां की सवारी सिंह हैं। मां की आराधना वाले इस दिन को रामनवमी भी कहा जाता है और शारदीय नवरात्रि के अगले दिन अर्थात दसवें दिन को रावण पर राम की विजय के रूप में मनाया जाता है।

ऐसे करें पूजा:  इस दिन माता सिद्धिदात्री को नवाह्न प्रसाद, नवरस युक्त भोजन, नौ प्रकार के पुष्प और नौ प्रकार के ही फल अर्पित करने चाहिए। सर्वप्रथम कलश की पूजा व उसमें स्थपित सभी देवी-देवताओ का ध्यान करना चाहिए। इसके पश्चात माता के मंत्रो का जाप कर उनकी पूजा करनी चाहिए। इस दिन नौ कन्याओं को घर में भोग लगाना चाहिए। नव-दुर्गाओं में सिद्धिदात्री अंतिम है तथा इनकी पूजा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। कन्याओं की आयु दो वर्ष से ऊपर और 10 वर्ष तक होनी चाहिए और इनकी संख्या कम से कम 9 तो होनी ही चाहिए। यदि 9 से ज्यादा कन्या भोज पर आ रही है तो कोई आपत्ति नहीं है।इस तरह से की गई पूजा से माता अपने भक्तों पर तुरंत प्रसन्न होती है। भक्तों को संसार में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन भक्तों को अपना सारा ध्यान निर्वाण चक्र की ओर लगाना चाहिए। यह चक्र हमारे कपाल के मध्य में स्थित होता है। ऐसा करने से भक्तों को माता सिद्धिदात्री की कृपा से उनके निर्वाण चक्र में उपस्थित शक्ति स्वतः ही प्राप्त हो जाती है।

मंत्र: सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।

     सेव्यमाना सदा भूयाात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।।

देवी का बीज मंत्र :

ऊॅं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमो नमः ।।

मां सिद्धदात्री की पूजा में हवन करने के लिए दुर्गा सप्तशती के सभी श्लोकों का प्रयोग किया जा सकता है।

जय माता की

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