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Horoscope Today May 15 2025 : Aaj ka Rashifal May 15 2025

Horoscope Today: Astrological prediction for 15 May 2025

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वैदिक पंचांग
दिनांक – 15 मई 2025
दिन – गुरूवार
विक्रम संवत – 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)
शक संवत -1947
अयन – उत्तरायण
ऋतु – ग्रीष्म ॠतु
मास – ज्येष्ठ (गुजरात-महाराष्ट्र वैशाख)
पक्ष – कृष्ण
तिथि – तृतीया 16 मई प्रातः04:02 तक तत्पश्चात चतुर्थी
नक्षत्र – ज्येष्ठा दोपहर 02:07 तक तत्पश्चात मूल
योग – शिव सुबह 07:02 तक तत्पश्चात सिद्ध
राहुकाल – दोपहर 02:14 से शाम 03:52 तक
सूर्योदय – 06:01
सूर्यास्त – 07:08
दिशाशूल – उत्तर दिशा मे
व्रत पर्व विवरण
मई पंचक 2025 तिथि
पंचक आरंभ: मई 20, 2025, मंगलवार, प्रातः 07:35 बजे
पंचक अंत: मई 24, 2025, शनिवार को दोपहर 01:48 बजे

जून पंचक 2025 तिथि
पंचक आरंभ: जून 16, 2025, सोमवार, दोपहर 01:10 बजे
पंचक अंत: जून 20, 2025, शुक्रवार, रात्रि 09:45 बजे

जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं बधाई और शुभ आशीष

दिनांक 15 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 6 होगा। आपमें गजब का आत्मविश्वास है। इसी आत्मविश्वास के कारण आप किसी भी परिस्थिति में डगमगाते नहीं है। आपको सुगंध का शौक होगा। इस अंक से प्रभावित व्यक्ति आकर्षक, विनोदी, कलाप्रेमी होते हैं। आप अपनी महत्वाकांक्षा के प्रति गंभीर होते हैं। 6 मूलांक शुक्र ग्रह द्वारा संचालित होता है। अत: शुक्र से प्रभावित बुराई भी आपमें पाई जा सकती है। जैसे स्त्री जाति के प्रति आपमें सहज झुकाव होगा। अगर आप स्त्री हैं तो पुरुषों के प्रति आपकी दिलचस्पी होगी। लेकिन आप दिल के बुरे नहीं है।

शुभ दिनांक : 6, 15, 24

शुभ अंक : 6, 15, 24, 33, 42, 51, 69, 78

शुभ वर्ष : 2026

ईष्टदेव : मां सरस्वती, महालक्ष्मी

शुभ रंग : क्रीम, सफेद, लाल, बैंगनी

जन्मतिथि के अनुसार भविष्यफल


नौकरीपेशा व्यक्ति अपने परिश्रम के बल पर उन्नति के हकदार होंगे। बैक परीक्षाओं में भी सफलता अर्जित करेंगे। दाम्पत्य जीवन में मिली जुली स्थिति रहेगी। आर्थिक मामलों में सभंलकर चलना होगा। लेखन संबंधी मामलों के लिए उत्तम होती है। जो विद्यार्थी सीए की परीक्षा देंगे उनके लिए शुभ रहेगा। व्यापार-व्यवसाय में भी सफलता रहेगी। विवाह के योग भी बनेंगे। स्त्री पक्ष का सहयोग मिलेगा

मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
आज के दिन आपको मिलाजुला फल देगा। दिन के आरंभ से मध्यान तक आर्थिक एवं पारिवारिक कारणों से मन बेचैन रहेगा। महिलाओ में आज बुद्धि विवेक की कमी रहने से बात बात में शक करेंगी व्यर्थ की बयान बाजी भी आग में घी का काम करेंगी। कार्य क्षेत्र पर भी धन को लेकर किसी से उलझेंगे। कार्य समय पर पूर्ण ना होने पर आपकी आलोचना भी होगी। संध्या से स्थिति में बदलाव आने लगेगा रुके कार्यो में गति आएगी थोड़ा बहुत धन लाभ भी होगा परन्तु खर्च की अपेक्षा कम ही रहेगा। महिलाये अपने किये आचरण को लेकर दुखी होंगी परन्तु गलती नहीं मानेंगी। संतानों से सुखदायक संबंध रहेंगे।

वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज का दिन आप आपके लिए परिश्रम वाला रहेगा घरेलू एवं व्यावसायिक कार्य एक साथ आने पर थोड़े असहज भी रहेंगे लेकिन महिलाओ का बराबर सहयोग मिलने से परेशानी से राहत मिलेगी। व्यावसायिक कार्य को लेकर मध्यान तक भाग दौड़ लगी रहेगी धन लाभ आज आवश्यकता अनुसार ही रहेगा। नौकरी पेशा जातक भी आज जल्दबाजी में कार्य करेंगे। मध्यान से पहले आवश्यक कार्य पूर्ण करलें इसके बाद शारीरिक रूप से कार्य करने मे सक्षम नही रहेंगे विघ्न बाधाएं भी बढ़ने से कार्य अधूरे रह जाएंगे। संध्या के समय बुरी खबर मिल सकती है। परिवार का वातावरण भी शाम को जाकर खराब होगा।

मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
आज के दिन व्यर्थ की भाग-दौड़ अधिक रहेगी व्यावसायिक कारणों से भी यात्रा के योग बनेंगे परन्तु अंत समय मे निरस्त भी हो सकते है। यात्रा होने पर भी लाभ की जगह खर्च बढेगा। कार्य क्षेत्र पर जल्दबाजी में कोई निर्णय ना लें कागजो को संभालकर रखें गुम हो सकते है। सरकारी कार्य आज ना करें नाही आज किसी से कोई वादा करें अन्यथा नई मुसीबत गले पड़ेगी। धन लाभ के लिए मानसिक एवं शारीरिक परिश्रम अधिक करना पड़ेगा फिर भी केवल निर्वाह योग्य आय ही हो सकेगी। महिलाये पूजा पाठ में दिखावा करेंगी लेकिन घरेलू मामलों के लिए लाभदायी ही रहेंगी। परिवार में किसी के अस्वस्थ्य होने की सम्भवना है।

कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज का दिन आपके लिए खर्चीला साबित होगा। रिश्तेदारी के साथ ही घरवालों की जिद पूरी करने में धन खर्च होने पर बजट गड़बड़ायेगा। आज आपकी मनोरंजन की प्रवृति रहने के कारण भी मौज-शौक एवं सुख सुविधा जुटाने पर अनावश्यक खर्च करेंगे। कार्य क्षेत्र पर आज आप ज्यादा गंभीर नही रहेंगे फिर भी व्यवसाय से रुक रुक कर धन लाभ होता रहेगा। दोपहर के बाद बनते कामो में अड़चनें आने लगेगी। कार्य क्षेत्र पर प्रतिस्पर्धी आपको हानि पहुचाने के प्रयास करेंगे। स्त्री का सहयोग घरेलू परिस्थिति को सामान्य बनाये रखेगा संध्या के बाद दिन भर की गतिविधियों से संतोष रहेगा।

सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज दिन के मध्यान तक का समय व्यर्थ की बहसबाजी में खराब होगा। स्वभाव में भी अहम रहने से स्वयंजन से टकराव की स्थिति बनेगी। महिलाये आज जानबूझ कर किसी काम को बिगाड़ेंगी बाद में इसका पश्चाताप भी होगा। हास परिहास भी मर्यादित ही करें आपकी मामूली बात भी किसी के दिल को चुभ सकती है। कार्य व्यवसाय दोपहर तक मंदा रहेगा इसके बाद आकस्मिक उछाल आने से व्यवस्तता बढ़ेगी। संध्या से समय में सुधार आने लगेगा। कार्य क्षेत्र पर आज मनमानी करने से बचे अन्यथा किसी से संबंध विच्छेद हो सकता है। स्वास्थ्य में सुधार आएगा।पारिवारिक वातावरण में थोड़ी बहुत कहासुनी लगी रहेगी।

कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज का दिन आपको शांति से बिताने की सलाह है पराये काम अथवा धन से दूरी बना कर रहें आज परोपकार के बदले अपशब्द सुनने को मिलेंगे। लोग आपसे स्वार्थ का संबंध रखेंगे काम निकलने के बाद मुह मोड़ लेंगे। आज पहले अपने उलझे कार्यो को सुलझाये बाद में ही किसी अन्य के कार्य देखें। आर्थक दृष्टिकोण से दिन निराशाजनक रहेगा। आय ना के बराबर परन्तु खर्च रोकने पर भी बढ़ चढ़ कर रहेंगे। कार्य क्षेत्र पर नए सौदे मिलेंगे लेकिन इनपर कार्य अतिशीघ्र आरम्भ करें लापरवाही करने पर हाथ से निकल सकते है। लंबी यात्रा की योजना अधर में रहेगी। आज आराम की चाह मन मे ही रह जायेगी।

तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
आज का दिन सामान्य ही रहेगा। आज आप के मन मे कुछ ना कुछ तिकड़म लगी रहेगी परन्तु साधनों की कमी के कारण कल्पनाओं को साकार रूप नही दे पाएंगे। महिलाये भी आज बाते बड़ी बड़ी करेंगी परन्तु अंदर से खोखलापन रहेगा। कार्य व्यवसाय बिना किसी की सहायता के चलाना मुश्किल होगा। व्यवसाय में आज किसी सौदे के अंतिम क्षण में पहुचने पर अचानक निरस्त होने से निराश होंगे। दोपहर के बाद आकस्मिक धन लाभ होने से राहत मिलेगी। नौकरी वाले लोगो को आज कुछ ना कुछ परेशानी बनी रहेगी। घर मे भी संध्या बाद सुख शांति लौटेगी।

वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज के दिन आपकी किसी मनोकामना की पूर्ति होने से प्रसन्न रहेंगे। व्यवसायी वर्ग व्यापार में विस्तार करेंगे जिसका लाभ भी शीघ्र ही मिलता दिखेगा। लेकिन आज पल पल पर राय देने वाले भी बहुत मिलेंगे जिससे थोड़ी असुविधा महसूस होगी। दिन के आरंभ में आलस्य ना करें अन्यथा सारी दिनचार्य अस्त व्यस्त हो जाएगी। दिन सभी कार्यो में फायदा दिलाने वाला है इसका भरपूर लाभ उठाएं संध्या बाद परिस्थिति बदलजायेगी जहां लाभ होना होगा वहां हानि होने से निराशा होगी। महिलाये आज अधिक मेहनत के कारण बीमार पड़ेंगी। परिवार में किसी के हाथ बड़ा नुकसान होने की संभावना है।

धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
आज दिन का पूर्वार्ध जितना बेचैनी भरा रहेगा दिन का अंतिम भाग उतना ही राहत वाला रहेगा। दिन के आरंभ में स्वास्थ्य संबंधित समस्याए कार्यो में बाधा डालेंगी। व्यवसाय में आज प्रयास करने पर भी हानि को रोक नही पाएंगे। अधिकांश कार्यो में आज किसी अन्य के ऊपर आश्रित रहना पड़ेगा लेकिन जिसके ऊपर आश्रित रहेंगे वह भी टालमटोल करेगा। उदासीनता मन पर हावी रहेगी। धर्म कर्म के प्रति आस्था रहेगी लेकिन पूजा पाठ के समय मन इधर उधर भटकने से शांति नही मिलेगी। संध्या बाद से सभी मामलों में राहत मिलने लगेगी। सेहत में सुधार आएगा। परिजनों का व्यवहार आज दिल दुखाने वाला ही रहेगा।

मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज का दिन आपके लिए आनंद दायक रहेगा। आप आज प्रत्येक कार्य को जांच पड़ताल कर ही करेंगे जिससे सफलता का प्रतिशत अधिक रहेगा। नौकरी व्यवसाय में आज मध्यान तक किया परिश्रम का फल संध्या के समय सम्मान एव धन लाभ के रूप में मिल जाएगा। कार्य क्षेत्र पर आज प्रतिस्पर्धा भी अधिक रहेगी लेकिन आपके काम निकालने की कला लाभ दिलाएगी। आज आप घरवालों की मनोकामना पूर्ति करने में हिचकिचाएंगे नही। परिजनों से स्नेह की वर्षा होगी। संतानो का व्यवहार भी आपके अनुकूल ही रहेगा। महिलाये घर की साज सज्जा पर खर्च करेंगी। सेहत सामान्य रहेगी।

कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज का दिन भी आपके लिए लाभदायी रहेगा बीते कल के अधूरे कार्य आज पूर्ण होने से धन की आमद होगी। नौकरी पेशा लोग भी अच्छे कार्य के लिए प्रोत्साहित होंगे। दूर के व्यवसायों अथवा शेयर आधी के कार्यो में उछाल आने से अन्य आय के साधन बनेंगे। सरकारी कार्यो में आज ढील ना दे अन्यथा लंबे समय के लिये लटक सकते है। धार्मिक कार्यो में रुचि होने पर भी उपयुक्त समय नही निकाल पाएंगे। संध्या के बाद समय प्रतिकूल हो जाएगा आसपास का वातावरण क्रोध दिलाने वाला बनेगा ना चाहते हुए भी किसी से झगड़ा होने की संभावना है। महिलाओ की सेहत खराब होगी।

मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज का दिन सरकारी अथवा अन्य कागजी कार्यवाही के लिए उत्तम है। सरकारी कार्य आज थोड़े से परिश्रम से आशाजनक परिणाम देंगे लेकिन किसी की सहायता आवश्यक रहेगी। कार्य व्यवसाय में भी आज प्रयास करने पर सरकार से सहयोग मिल सकता है। धन की आमद मध्यान तक उत्तम रहेगी इसके बाद कुछ समय के लिए रुकावटे आएगी। महिलाये संतानो अथवा अन्य घरेलू उलझनों के कारण थोड़ी परेशान रहेंगी इसका निराकरण संध्या बाद ही सम्भव होगा। नौकरीपेशा जातक अधिकारियों के कृपापात्र बनेगे काम निकलना आज आसान रहेगा वरिष्ठ नागरिकों द्वारा प्रशंशा होगी।

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हनुमान जी और वास्तु शास्त्र

वास्तु शास्त्र
यदि घर में देवीदेवताओं के चित्र लगे हों तो घर में कई तरह की परेशानियां दूर हो जाती हैं और घर में सुखशांति बनी रहती है। वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर में हनुमान जी की तस्वीर लगाने से कई लाभ मिलते हैं। अगर घर में वास्तु के नियमानुसार सही दिशा में सही तरह से हनुमानजी की तस्वीर लगाई जाए तो कई लाभ हो सकते हैं।
1⃣ हनुमानजी बाल ब्रहमचारी है इसलिए उनकी तस्वीर बेडरूम में नहीं लगानी चाहिए। बेडरूम में लगाई गई हनुमानजी की तस्वीर शुभ फल नहीं देती।
2⃣ भगवान हनुमानजी की तस्वीर घर या दुकान में दक्षिण दिशा की ओर लगाना सबसे अच्छा माना जाता है। क्योंकि हनुमानजी ने अपनी शक्तियों का प्रयोग दक्षिण दिशा की ओर दिखाया था।
3⃣ घर मे पंचमुखी, पर्वत उठाते हुए या राम भजन करते हुए हनुमानजी की तस्वीर लगाना सबसे अच्छा होता है। इससे घर के सभी दोष खत्म हो जाते हैं।
4⃣ उत्तर दिशा में हनुमानजी की तस्वीर लगाने पर दक्षिण दिशा से आने वाली प्रत्येक नकारात्मक शक्ति को हनुमानजी रोक देते हैं। इससे घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है।
5⃣ जिस रुप में हनुमानजी अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर रहे हो. ऐसी तस्वीर घर में लगाने से किसी तरह की बुरी शक्ति घर में प्रवेश नहीं कर पाती।
6⃣ हनुमानजी की तस्वीर पर सिंदूर जरुर लगाना चाहिए। ऐसा कर पाने पर सिंदूर का केवल तिलक भी किया जा सकता है। इससे सभी मनोकामनाएं जरुर पूरी होती हैं

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हनुमान जी और वास्तु शास्त्र

हनुमान जन्मोत्सव
धर्म ग्रंथों में हनुमानजी के 12 नाम बताए गए हैं, जिनके द्वारा उनकी स्तुति की जाती है। गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित श्रीहनुमान अंक के अनुसार हनुमानजी के इन 12 नामों का जो रात में सोने से पहले सुबह उठने पर अथवा यात्रा प्रारंभ करने से पहले पाठ करता है, उसके सभी भय दूर हो जाते हैं और उसे अपने जीवन में सभी सुख प्राप्त होते हैं। वह अपने जीवन में अनेक उपलब्धियां प्राप्त करता है। हनुमानजी की 12 नामों वाली स्तुति इस प्रकार है

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स्तुति
हनुमानअंजनीसूनुर्वायुपुत्रो महाबल:
रामेष्ट: फाल्गुनसख: पिंगाक्षोअमितविक्रम:।।
उदधिक्रमणश्चेव सीताशोकविनाशन:
लक्ष्मणप्राणदाता दशग्रीवस्य दर्पहा।।
एवं द्वादश नामानि कपीन्द्रस्य महात्मन:
स्वापकाले प्रबोधे यात्राकाले : पठेत्।।
तस्य सर्वभयं नास्ति रणे विजयी भवेत्।
राजद्वारे गह्वरे भयं नास्ति कदाचन।।
इन 12 नामो से होती है हनुमानजी की स्तुति, जानिए इनकी महिमा
🙏🏻 हनुमान
हनुमानजी का यह नाम इसलिए पड़ा क्योकि एक बार क्रोधित होकर देवराज इंद्र ने इनके ऊपर अपने वज्र का प्रहार किया था यह वज्र सीधे इनकी ठोड़ी (हनु) पर लगा। हनु पर वज्र का प्रहार होने के कारण ही इनका नाम हनुमान पड़ा
🙏🏻 लक्ष्मणप्राणदाता
जब रावण के पुत्र इंद्रजीत ने शक्ति का उपयोग कर लक्ष्मण को बेहोश कर दिया था, तब हनुमानजी संजीवनी बूटी लेकर आए थे। उसी बूटी के प्रभाव से लक्ष्मण को होश आया था।इस लिए हनुमानजी को लक्ष्मणप्राणदाता भी कहा जाता है
🙏🏻 दशग्रीवदर्पहा
दशग्रीव यानी रावण और दर्पहा यानी धमंड तोड़ने वाला हनुमानजी ने लंका जाकर सीता माता का पता लगाया, रावण के पुत्र अक्षयकुमार का वध किया साथ ही लंका में आग भी लगा दी ।इस प्रकार हनुमानजी ने कई बार रावण का धमंड तोड़ा था इसलिए इनका एक नाम ये भी प्रसिद्ध है
🙏🏻 रामेष्ट
हनुमान भगवान श्रीराम के परम भक्त हैं धर्म ग्रंथों में अनेक स्थानों पर वर्णन मिलता है कि श्रीराम ने हनुमान को अपना प्रिय माना है भगवान श्रीराम को प्रिय होने के कारण ही इनका एक नाम रामेष्ट भी है
🙏🏻 फाल्गुनसुख
महाभारत के अनुसार, पांडु पुत्र अर्जुन का एक नाम फाल्गुन भी है युद्ध के समय हनुमानजी अर्जुन के रथ की ध्वजा पर विराजित थे इस प्रकार उन्होंने अर्जुन की सहायता की सहायता करने के कारण ही उन्हें अर्जुन का मित्र कहा गया है फाल्गुन सुख का अर्थ है अर्जुन का मित्र
🙏🏻 पिंगाक्ष
पिंगाक्ष का अर्थ है भूरी आंखों वाला ।अनेक धर्म ग्रंथों में हनुमानजी का वर्णन किया गया है उसमें हनुमानजी को भूरी आंखों वाला बताया है इसलिए इनका एक नाम पिंगाक्ष भी है
🙏🏻 अमितविक्रम
विक्रम का अर्थ है पराक्रमी और अमित का अर्थ है बहुत अधिक हनुमानजी ने अपने पराक्रम के बल पर ऐसे बहुत से कार्य किए, जिन्हें करना देवताओं के लिए भी कठिन था इसलिए इन्हें अमितविक्रम भी कहा जाता हैं
🙏🏻 उदधिक्रमण
उदधिक्रमण का अर्थ है समुद्र का अतिक्रमण करने वाले यानी लांधने वाला सीता माता की खोज करते समय हनुमानजी ने समुद्र को लांधा था। इसलिए इनका एक नाम ये भी है
🙏🏻 अंजनीसुत
माता अंजनी के पुत्र होने के कारण ही हनुमानजी का एक नाम अंजनीसुत भी प्रसिद्ध है
🙏🏻 वायुपुत्र
हनुमानजी का एक नाम वायुपुत्र भी है पवनदेव के पुत्र होने के कारण ही इन्हें वायुपुत्र भी कहा जाता है
🙏🏻 महाबल
हनुमानजी के बल की कोई सीमा नहीं हैं इसलिए इनका एक नाम महाबल भी है
🙏🏻 सीताशोकविनाशन
माता सीता के शोक का निवारण करने के कारण हनुमानजी का ये नाम पड़ा

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हनुमान जयन्ती

स्तुति
हनुमानअंजनीसूनुर्वायुपुत्रो महाबल:
रामेष्ट: फाल्गुनसख: पिंगाक्षोअमितविक्रम:।।
उदधिक्रमणश्चेव सीताशोकविनाशन:
लक्ष्मणप्राणदाता दशग्रीवस्य दर्पहा।।
एवं द्वादश नामानि कपीन्द्रस्य महात्मन:
स्वापकाले प्रबोधे यात्राकाले : पठेत्।।
तस्य सर्वभयं नास्ति रणे विजयी भवेत्।
राजद्वारे गह्वरे भयं नास्ति कदाचन।।
🙏🏻 इन 12 नामो से होती है हनुमानजी की स्तुति, जानिए इनकी महिमा
🙏🏻 हनुमान
हनुमानजी का यह नाम इसलिए पड़ा क्योकि एक बार क्रोधित होकर देवराज इंद्र ने इनके ऊपर अपने वज्र का प्रहार किया था यह वज्र सीधे इनकी ठोड़ी (हनु) पर लगा। हनु पर वज्र का प्रहार होने के कारण ही इनका नाम हनुमान पड़ा
🙏🏻 लक्ष्मणप्राणदाता
जब रावण के पुत्र इंद्रजीत ने शक्ति का उपयोग कर लक्ष्मण को बेहोश कर दिया था, तब हनुमानजी संजीवनी बूटी लेकर आए थे। उसी बूटी के प्रभाव से लक्ष्मण को होश आया था।इस लिए हनुमानजी को लक्ष्मणप्राणदाता भी कहा जाता है
🙏🏻 दशग्रीवदर्पहा
दशग्रीव यानी रावण और दर्पहा यानी धमंड तोड़ने वाला हनुमानजी ने लंका जाकर सीता माता का पता लगाया, रावण के पुत्र अक्षयकुमार का वध किया साथ ही लंका में आग भी लगा दी ।इस प्रकार हनुमानजी ने कई बार रावण का धमंड तोड़ा था इसलिए इनका एक नाम ये भी प्रसिद्ध है
🙏🏻 रामेष्ट
हनुमान भगवान श्रीराम के परम भक्त हैं धर्म ग्रंथों में अनेक स्थानों पर वर्णन मिलता है कि श्रीराम ने हनुमान को अपना प्रिय माना है भगवान श्रीराम को प्रिय होने के कारण ही इनका एक नाम रामेष्ट भी है
🙏🏻 फाल्गुनसुख
महाभारत के अनुसार, पांडु पुत्र अर्जुन का एक नाम फाल्गुन भी है युद्ध के समय हनुमानजी अर्जुन के रथ की ध्वजा पर विराजित थे इस प्रकार उन्होंने अर्जुन की सहायता की सहायता करने के कारण ही उन्हें अर्जुन का मित्र कहा गया है फाल्गुन सुख का अर्थ है अर्जुन का मित्र
🙏🏻 पिंगाक्ष
पिंगाक्ष का अर्थ है भूरी आंखों वाला ।अनेक धर्म ग्रंथों में हनुमानजी का वर्णन किया गया है उसमें हनुमानजी को भूरी आंखों वाला बताया है इसलिए इनका एक नाम पिंगाक्ष भी है
🙏🏻 अमितविक्रम
विक्रम का अर्थ है पराक्रमी और अमित का अर्थ है बहुत अधिक हनुमानजी ने अपने पराक्रम के बल पर ऐसे बहुत से कार्य किए, जिन्हें करना देवताओं के लिए भी कठिन था इसलिए इन्हें अमितविक्रम भी कहा जाता हैं
🙏🏻 उदधिक्रमण
उदधिक्रमण का अर्थ है समुद्र का अतिक्रमण करने वाले यानी लांधने वाला सीता माता की खोज करते समय हनुमानजी ने समुद्र को लांधा था। इसलिए इनका एक नाम ये भी है
🙏🏻 अंजनीसुत
माता अंजनी के पुत्र होने के कारण ही हनुमानजी का एक नाम अंजनीसुत भी प्रसिद्ध है
🙏🏻 वायुपुत्र
हनुमानजी का एक नाम वायुपुत्र भी है पवनदेव के पुत्र होने के कारण ही इन्हें वायुपुत्र भी कहा जाता है
🙏🏻 महाबल
हनुमानजी के बल की कोई सीमा नहीं हैं इसलिए इनका एक नाम महाबल भी है
🙏🏻 सीताशोकविनाशन
माता सीता के शोक का निवारण करने के कारण हनुमानजी का ये नाम पड़ा

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कामदाएकादशी

आज कामदा एकादशी हैं।

सर्वप्रथम आपसभी को कामदा एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं! यह व्रत आपके जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और सफलता लाए।

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चैत्र शुक्ल पक्ष में कामदा नाम की एकादशी होती है। कहा गया है कि ‘कामदा एकादशी’ ब्रह्महत्या आदि पापों तथा पिशाचत्व आदि दोषों का नाश करने वाली है। इसके पढ़ने और सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है।
व्रत कथा

युधिष्ठिर ने पूछा: वासुदेव ! आपको नमस्कार है ! कृपया आप यह बताइये कि चैत्र शुक्लपक्ष में किस नाम की एकादशी होती है?
भगवान श्रीकृष्ण बोले: राजन् ! एकाग्रचित्त होकर यह पुरातन कथा सुनो, जिसे वशिष्ठजी ने राजा दिलीप के पूछने पर कहा था ।

वशिष्ठजी बोले: राजन् ! चैत्र शुक्लपक्ष में ‘कामदा’ नाम की एकादशी होती है । वह परम पुण्यमयी है । पापरुपी ईँधन के लिए तो वह दावानल ही है ।
प्राचीन काल की बात है: नागपुर नाम का एक सुन्दर नगर था, जहाँ सोने के महल बने हुए थे । उस नगर में पुण्डरीक आदि महा भयंकर नाग निवास करते थे । पुण्डरीक नाम का नाग उन दिनों वहाँ राज्य करता था । गन्धर्व, किन्नर और अप्सराएँ भी उस नगरी का सेवन करती थीं । वहाँ एक श्रेष्ठ अप्सरा थी, जिसका नाम ललिता था । उसके साथ ललित नामवाला गन्धर्व भी था । वे दोनों पति पत्नी के रुप में रहते थे । दोनों ही परस्पर काम से पीड़ित रहा करते थे । ललिता के हृदय में सदा पति की ही मूर्ति बसी रहती थी और ललित के हृदय में सुन्दरी ललिता का नित्य निवास था ।
एक दिन की बात है । नागराज पुण्डरीक राजसभा में बैठकर मनोरंजन कर रहा था । उस समय ललित का गान हो रहा था किन्तु उसके साथ उसकी प्यारी ललिता नहीं थी । गाते-गाते उसे ललिता का स्मरण हो आया । अत: उसके पैरों की गति रुक गयी और जीभ लड़खड़ाने लगी ।
नागों में श्रेष्ठ कर्कोटक को ललित के मन का सन्ताप ज्ञात हो गया, अत: उसने राजा पुण्डरीक को उसके पैरों की गति रुकने और गान में त्रुटि होने की बात बता दी । कर्कोटक की बात सुनकर नागराज पुण्डरीक की आँखे क्रोध से लाल हो गयीं । उसने गाते हुए कामातुर ललित को शाप दिया : ‘दुर्बुद्धे ! तू मेरे सामने गान करते समय भी पत्नी के वशीभूत हो गया, इसलिए राक्षस हो जा ।’

महाराज पुण्डरीक के इतना कहते ही वह गन्धर्व राक्षस हो गया । भयंकर मुख, विकराल आँखें और देखनेमात्र से भय उपजानेवाला रुप – ऐसा राक्षस होकर वह कर्म का फल भोगने लगा । ललिता अपने पति की विकराल आकृति देख मन ही मन बहुत चिन्तित हुई । भारी दु:ख से वह कष्ट पाने लगी । सोचने लगी: ‘क्या करुँ ? कहाँ जाऊँ ? मेरे पति पाप से कष्ट पा रहे हैं…’
वह रोती हुई घने जंगलों में पति के पीछे-पीछे घूमने लगी । वन में उसे एक सुन्दर आश्रम दिखायी दिया, जहाँ एक मुनि शान्त बैठे हुए थे । किसी भी प्राणी के साथ उनका वैर विरोध नहीं था । ललिता शीघ्रता के साथ वहाँ गयी और मुनि को प्रणाम करके उनके सामने खड़ी हुई । मुनि बड़े दयालु थे । उस दु:खिनी को देखकर वे इस प्रकार बोले : ‘शुभे ! तुम कौन हो ? कहाँ से यहाँ आयी हो? मेरे सामने सच-सच बताओ ।’
ललिता ने कहा: महामुने ! वीरधन्वा नामवाले एक गन्धर्व हैं । मैं उन्हीं महात्मा की पुत्री हूँ । मेरा नाम ललिता है । मेरे स्वामी अपने पाप दोष के कारण राक्षस हो गये हैं । उनकी यह अवस्था देखकर मुझे चैन नहीं है । ब्रह्मन् ! इस समय मेरा जो कर्त्तव्य हो, वह बताइये । विप्रवर! जिस पुण्य के द्वारा मेरे पति राक्षसभाव से छुटकारा पा जायें, उसका उपदेश कीजिये ।
ॠषि बोले: भद्रे ! इस समय चैत्र मास के शुक्लपक्ष की ‘कामदा’ नामक एकादशी तिथि है, जो सब पापों को हरने वाली और उत्तम है । तुम उसी का विधिपूर्वक व्रत करो और इस व्रत का जो पुण्य हो, उसे अपने स्वामी को दे डालो । पुण्य देने पर क्षणभर में ही उसके शाप का दोष दूर हो जायेगा
राजन् ! मुनि का यह वचन सुनकर ललिता को बड़ा हर्ष हुआ । उसने एकादशी को उपवास करके द्वादशी के दिन उन ब्रह्मर्षि के समीप ही भगवान वासुदेव के (श्रीविग्रह के) समक्ष अपने पति के उद्धार के लिए यह वचन कहा: ‘मैंने जो यह कामदा एकादशी का उपवास व्रत किया है, उसके पुण्य के प्रभाव से मेरे पति का राक्षसभाव दूर हो जाय ।’
वशिष्ठजी कहते हैं: ललिता के इतना कहते ही उसी क्षण ललित का पाप दूर हो गया । उसने दिव्य देह धारण कर लिया । राक्षसभाव चला गया और पुन: गन्धर्वत्व की प्राप्ति हुई
नृपश्रेष्ठ ! वे दोनों पति पत्नी ‘कामदा’ के प्रभाव से पहले की अपेक्षा भी अधिक सुन्दर रुप धारण करके विमान पर आरुढ़ होकर अत्यन्त शोभा पाने लगे । यह जानकर इस एकादशी के व्रत का यत्नपूर्वक पालन करना चाहिए ।
मैंने लोगों के हित के लिए तुम्हारे सामने इस व्रत का वर्णन किया है । ‘कामदा एकादशी’ ब्रह्महत्या आदि पापों तथा पिशाचत्व आदि दोषों का नाश करने वाली है । राजन् ! इसके पढ़ने और सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है

मान्यता है कि कामदा एकादशी के दिन धर्म कार्य में दान पुण्य का कार्य करने से पापों का नाश हो जाता हैं और आर्थिक, शारीरिक और मानसिक चिंताओं से मुक्ति मिलती है, साथ में परिवार में खुशहाली और रिश्तों में मधुरता भी आती हैं। अतः इस शुभ अवसर पे दान पुण्य का कार्य अवश्य करें।

भगवान श्री विष्णु की कृपा से संपूर्ण सृष्टि का कल्याण हो, सभी का जीवन संकट मुक्त, सुख-समृद्धि एवं आरोग्यता से परिपूर्ण हो, यही प्रार्थना है

कामदाएकादशी Read More »

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